हिमाचल में चिट्टे की जड़ें मजबूत, 15-30 साल की उम्र के लड़के लड़कियां कर रहे सबसे ज्यादा नशा

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HNH | पुलिस द्वारा नशा तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही के बाद भी हिमाचल में नशे की जड़ें मजबूत होती जा रही हैं. चिंता की बात यह है की हिमाचल में चिट्टा (हेरोइन) लेने वालो की संख्या, भांग (चरस) और अन्य नशीले पदार्थ लेने वालों संख्या से ज्यादा हो चुकी है.

हिमाचल के सब नशेड़ियों में से 34.61 प्रतिशत सिर्फ चिट्टे के नशेड़ी हैं. हैरान करने वाली बात यह है कि नशा करने वालों में सबसे ज्यादा 15-30 वर्ष की आयु के युवक हैं.

प्रदेश के 27 नशामुक्ति केंद्रों के 1,170 रोगियों में से 421 शराबी (35.98 प्रतिशत), 405 चिट्टा लेने वाले (34.61 प्रतिशत), 291 चरस लेने वाले (24.87 प्रतिशत) और 53 लोग रासायनिक/सिंथेटिक नशा (4.52 प्रतिशत) लेने वाले हैं.

15-30 वर्ष आयु वर्ग के युवकों में चिट्टा उनकी पहली पसंद बन गयी है जो की एक गंभीर बात है. दो लड़कियों सहित 273 मामले चिट्टे के आदी पाए गए. नशा केंद्र में दर्ज सबसे कम उम्र का चिट्टा लेने वाला युवक महज 13 साल का है.

ऊपर बताये गए आंकड़े न के बराबर हैं क्यूंकि नशा केंद्रों में 3 प्रतिशत से भी कम मामले हैं. इसके अलावा, चिट्टा और अन्य ड्रग्स लेने वाली लड़कियों के बारे में सटीक डेटा उपलब्ध नहीं है क्योंकि महिलाओं के लिए कोई नशामुक्ति केंद्र नहीं है. लेकिन मंडी, कांगड़ा, शिमला और सोलन जिलों में नशा करने वाली लड़कियों की संख्या बढ़ती जा रही है.

चिट्टा सेमि-सिंथेटिक ओपिओइड, हेरोइन का मिलाजुला रूप है. इसे लेने वाला सिर्फ तीन बार में ही इसका आदी हो जाता हैं. यह नशा अत्यधिक घातक है क्योंकि इसके ओवरडोज से मृत्यु भी हो सकती है.

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