किसानों को नहीं मिल रहे फसलों के खरीददार, आधे भाव फसलें बेचने को मजबूर

किसानों को नहीं मिल रहे फसलों के खरीददार
किसानों को नहीं मिल रहे फसलों के खरीददार

कांगड़ा HNH | कांगड़ा जिले के निचले क्षेत्रों में गेहूं, मक्की के खरीददार न मिलने से किसान बहुत परेशान हैं. अपनी फसलों के बिक्री मूल्य में आयी भारी गिरावट से परेशान, छोटे-छोटे खेतों वाले किसान अपना अनाज व्यापारियों को कौड़ियों के भाव बेचने को मजबूर हैं.

नए फार्म बिल के कारण कई अनाज व्यापारी किसानों से मक्का खरीदने के लिए पीछे हट रहे हैं.

कोपरा के सुभाष सिंह और दीवान चंद, लगोर के अशोक कुमार और बडका गांवों के खुशी राम ने कहा कि पहले व्यापारी खरीद मूल्य (buying price) तय करने के लिए कटाई के दौरान ही खेतों में आ जाते थे, और उन्हें एमएसपी से ज्यादा मूल्य मिलता था. लेकिन इस साल, मक्का खरीदने के लिए एक भी व्यापारी नहीं आया, और हमें कुछ स्थानीय अनाज खरीदारों द्वारा 1,200 रुपये प्रति क्विंटल दिए जा रहे हैं, यानिकि 12 रूपये प्रति किलो.

रीत ग्राम पंचायत के विक्रम सिंह और नरेश सिंह ने कहा कि उन्होंने अप्रैल में कटाई के बाद 50 क्विंटल गेहूं उच्च दरों पर बेचने के लिए स्टोर में इक्कठा कर लिया था, लेकिन अब नए फार्म बिल के बाद उनकी सभी आशाएं धराशायी हो गईं क्योंकि अब उन्हें फसलों की बहुत कम कीमत दी जा रही है.

सरकार ने गेहूं का एमएसपी 1,975 रुपये तय किया था, लेकिन अब एफसीआई (Food Corporation of India) ने फसलें खरीदना बंद कर दिया जिससे अब व्यापारियों द्वारा उन्हें 1,500 रुपये से 1,600 रुपये दिए जा रहे हैं.

पालमपुर के कृषि अधिकारी कुलदीप धीमान ने स्वीकार किया कि किसान एफसीआई के नूरपुर खरीद केंद्र में गेंहू बेचने की वजाय निजी खरीदारों को गेहूं बेचना पसंद करते हैं, लेकिन इस साल कोई भी खरीददार न होने के कारण किसानों को अपनी उपज बेचने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है.

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